मंगलवार, 19 जनवरी 2021

रस प्रक्रिया (भट्टनायक और अभिनवगुप्त) (RAS PRAKRIYA II BHATTNAYAK AUR ABHINAVGUPTA)

रस प्रक्रिया (भट्टनायक और अभिनवगुप्त) (RAS PRAKRIYA II BHATTNAYAK AUR ABHINAVGUPTA) रस प्रक्रिया (भट्टनायक और अभिनवगुप्त) (RAS PRAKRIYA II BHATTNAYAK AUR ABHINAVGUPTA)

रस प्रक्रिया (भट्टलोलट और शंकुक) RAS PRAKRIYA (BHATTLOLLAT AUR SHANKUK)

रस प्रक्रिया (भट्टलोलट और शंकुक) RAS PRAKRIYA (BHATTLOLLAT AUR SHANKUK) रस प्रक्रिया (भट्टलोलट और शंकुक) RAS PRAKRIYA (BHATTLOLLAT AUR SHANKUK)

भरतपूर्व एवं भरत का रस विचार (BHRAT PURVA EVAM BHARAT KA RAS VICHAR)

भरतपूर्व एवं भरत का रस विचार (BHRAT PURVA EVAM BHARAT KA RAS VICHAR) भरतपूर्व एवं भरत का रस विचार (BHRAT PURVA EVAM BHARAT KA RAS VICHAR)

भारतीय काव्यशास्त्र - रसों का परिचय (RASON KA PARICHAY)

भारतीय काव्यशास्त्र - रसों का परिचय 

1. रस संप्रदाय का प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ है।
(A) नाट्यशास्त्र
(B) ध्वन्यालोक
(C) अलंकारमंजरी
(D) रसमंजरी

2. निम्नलिखित में से किसे व्यभिचारी भाव कहा जाता है
(क) स्थायी भाव (ख) विभाव (ग) संचारी भाव (घ) अनुभाव

3. निम्नलिखित स्थायी भावों को उनके रस के साथ सुमेलित कीजिए –
सूची – 1 (स्थायी भाव) (क) उत्साह (ख) शोक (ग) जुगुप्सा (घ) निर्वेद
सूची – 2 (रस) 1. करूण 2. शान्त 3. वीर 4. रौद्र 5. बीभत्स
कूट –
A B C D
(A) 3 1 5 2
(B) 1 3 4 5
(C) 4 2 1 3
(D) 3 5 1 4

4. 'रस मीमांसा' के विषय में कहा जाता है –
I. 'रस मीमांसा' के लेखक अभिनव गुप्त हैं।
॥. रस मीमांसा' के लेखक रामचंद्र शुक्ल हैं।
III. रस मीमांसा' के संपादक विश्वनाथ प्रसाद मिश्र हैं।
IV. रस मीमांसा' के लेखक विश्वनाथ प्रसाद मिश्र हैं।

सही विकल्प बताइए –
(A) । और II सही
(B) II और III सही
(C) I सही और III गलत
(D) ॥ सही और III गलत

5. "विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः" रससूत्र है -
I. उक्त सूत्र के उद्भावक मम्मट हैं।
॥. उक्त सूत्र में संचारी भाव का उल्लेख है ।
III. उक्त सूत्र में स्थायीभाव का स्पष्ट उल्लेख है ।
IV. उक्त तीनों कथन सही हैं।
सही विकल्प बताइए –
(A) I और II दोनों सही
(B) I, ।I और ।।। तीनों सही
(C) । और III दोनों सही
(D) I, III, IV तीनों गलत

6. प्रेयानू रस की चर्चा सर्वप्रथम किस आचार्य ने की –
(क) आनन्दवर्धन (ख) उद्भट (ग) भरतमुनि (घ) रुद्रट

7. भरत मुनि ने कितने रस माने हैं ---
(क) नौ (ख) आठ (ग) दस (घ) ग्यारह

8. स्थायी भावों की संख्या कितनी मानी गई है –
(क) आठ (ख) नौ (ग) दस (घ) ग्यारह

9. किस रस को रसराज की संज्ञा दी गई है –
(क) करूण (ख) वात्सल्य (ग) श्रृंगार (घ) रौद्र

10. संचारी भावों की संख्या कितनी होती है –
(क) दस (ख) नौ (ग) तौंतीस (घ) पच्चीस


  भारतीय काव्यशास्त्र - रसों का परिचय (RASON KA PARICHAY)

भारतीय काव्यशास्त्र – रस अवयव-स्वरूप (RAS AVAYAV AUR SWAROOP)

भारतीय काव्यशास्त्र – रस अवयव-स्वरूप

1. रस संप्रदाय का प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ है।
(A) नाट्यशास्त्र
(B) ध्वन्यालोक
(C) अलंकारमंजरी
(D) रसमंजरी

2. निम्नलिखित में से किसे व्यभिचारी भाव कहा जाता है
(क) स्थायी भाव (ख) विभाव 
(ग) संचारी भाव (घ) अनुभाव 

3. निम्नलिखित स्थायी भावों को उनके रस के साथ सुमेलित कीजिए –
सूची – 1 (स्थायी भाव)   (क) उत्साह (ख) शोक (ग) जुगुप्सा (घ) निर्वेद
सूची – 2 (रस)                  1. करूण 2. शान्त 3. वीर 4. रौद्र 5. बीभत्स
कूट –
     A B C D
(A) 3 1 5 2
(B) 1 3 4 5
(C) 4 2 1 3
(D) 3 5 1 4

4. 'रस मीमांसा' के विषय में कहा जाता है –
I. 'रस मीमांसा' के लेखक अभिनव गुप्त हैं।
॥. रस मीमांसा' के लेखक रामचंद्र शुक्ल हैं।
III. रस मीमांसा' के संपादक विश्वनाथ प्रसाद मिश्र हैं।
IV. रस मीमांसा' के लेखक विश्वनाथ प्रसाद मिश्र हैं।

सही विकल्प बताइए –
(A) । और II सही 
(B) II और III सही 
(C) I सही और III गलत
(D) ॥ सही और III गलत

5. "विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः" रससूत्र है -
I. उक्त सूत्र के उद्भावक मम्मट हैं।
॥. उक्त सूत्र में संचारी भाव का उल्लेख है ।
III. उक्त सूत्र में स्थायीभाव का स्पष्ट उल्लेख है ।
IV. उक्त तीनों कथन सही हैं।
सही विकल्प बताइए –
(A) I और II दोनों सही
(B) I, ।I और ।।। तीनों सही
(C) । और III दोनों सही
(D) I, III, IV तीनों गलत 

6. प्रेयानू रस की चर्चा सर्वप्रथम किस आचार्य ने की –
(क) आनन्दवर्धन (ख) उद्भट (ग) भरतमुनि 
(घ) रुद्रट 

7. भरत मुनि ने कितने रस माने हैं ---
(क) नौ 
(ख) आठ (ग) दस (घ) ग्यारह 

8. स्थायी भावों की संख्या कितनी मानी गई है –
(क) आठ (ख) नौ (ग) दस (घ) ग्यारह

9. किस रस को रसराज की संज्ञा दी गई है –
(क) करूण (ख) वात्सल्य 
(ग) श्रृंगार  (घ) रौद्र 

10. संचारी भावों की संख्या कितनी होती है –
(क) दस (ख) नौ 
(ग) तौंतीस (घ) पच्चीस 

11. मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।
शान्त
श्रृंगार
करुण
हास्य

  भारतीय काव्यशास्त्र – रस अवयव-स्वरूप (RAS AVAYAV AUR SWAROOP)