बुधवार, 23 मार्च 2022

स्वामी आनंद | SWAMI ANAND | INDIAN HINDI POET | साहित्यकार का जीवन परिचय

स्वामी आनंद

(1887-1976)

संन्यासी स्वामी आनंद का जन्म गुजरात के कठियावाड़ जिले के किमड़ी गाँव में सन् 1887 में हुआ। इनका मूल नाम हिम्मतलाल था। जब ये दस साल के थे तभी कुछ साधु इन्हें अपने साथ हिमालय की ओर ले गए और इनका नामकरण किया- स्वामी आनंद। 1907 में स्वामी आनंद स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए। महाराष्ट्र से कुछ समय तक 'तरुण हिंद' अखबार निकाला, फिर बाल गंगाधर तिलक से के 'केसरी' अखबार से जुड़ गए। 1917 में गांधीजी के संसर्ग में आने के बाद उन्हीं के निर्देशन में 'नवजीवन' और 'यंग इंडिया' की प्रसार व्यवस्था सँभाल ली। इसी बहाने इन्हें, गांधीजी और उनके निजी सहयोगी महादेव भाई देसाई और बाद में प्यारेलाल जी को निकट से जानने का अवसर मिला। मूलत: गुजराती भाषा में लिखे गए प्रस्तुत पाठ 'शुक्रतारे के समान' में लेखक ने गांधीजी के निजी सचिव महादेव भाई देसाई की बेजोड़ प्रतिभा और व्यस्ततम दिनचर्या को उकेरा हैं। लेखक अपने इस रेखाचित्र के नायक के व्यक्तित्व और उसकी ऊर्जा, उनकी लगन और प्रतिभा से अभिभूत है। महादेव भाई की सरलता, सज्जनता, निष्ठा, समर्पण, लगन और निरभिमान को लेखक ने पूरी ईमानदारी से शब्दों में पिरोया है। इनकी लेखनी महादेव के व्यक्तित्व का ऐसा चित्र खींचने में सफल रही है कि पाठक को महादेव भाई पर अभिमान हो आता है।

लेखक के अनुसार कोई भी महान व्यक्ति, महानतम कार्य तभी कर पाता है, जब उसके साथ ऐसे सहयोगी हों जो उसकी तमाम इतर चिंताओं और उलझनों को अपने सिर ले लें। गांधीजी के लिए महादेव भाई और भाई प्यारेलाल जी ऐसी ही शख्सियत थे।

गणेशशंकर विद्यार्थी | GANESH SHANKAR VIDYARTHI | INDIAN HINDI POET | साहित्यकार का जीवन परिचय

गणेशशंकर विद्यार्थी

(1890 - 1931)

गणेशशंकर विद्यार्थी का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में सन् 1890 में हुआ। एंट्रेंस पास करने के बाद वे कानपुर करेंसी दफ्तर में मुलाज़िम हो गए। फिर 1921 में 'प्रताप' साप्ताहिक अखबार निकालना शुरू किया। विद्यार्थी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को अपना साहित्यिक गुरु मानते थे। उन्हीं की प्रेरणा से आज़ादी की अलख जगानेवाली रचनाओं का सृजन और अनुवाद उन्होंने किया। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने सहायक पत्रकारिता की। विद्यार्थी के जीवन का ज्यादातर समय जेलों में बीता। इन्हें बार-बार जेल में डालकर भी अंग्रेज़ सरकार को संतुष्टि नहीं मिली। वह इनका अखबार भी बंद करवाना चाहती थी। कानपुर में 1931 में मचे सांप्रदायिक दंगों को शांत करवाने के प्रयास में विद्यार्थी को अपने प्राणों की बलि देनी पड़ी। इनकी मृत्यु पर महात्मा गांधी ने कहा था : काश! ऐसी मौत मुझे मिली होती।

विद्यार्थी अपने जीवन में भी और लेखन में भी गरीबों, किसानों, मज़लूमों, मज़दूरों आदि के प्रति सच्ची हमदर्दी का इज़हार करते थे। देश की आजादी की मुहिम में आड़े आनेवाले किसी भी कृत्य या परंपरा को वह आड़े हाथों लेते थे। देश की आजादी उनकी नज़र में सबसे महत्त्वपूर्ण थी। आपसी भाईचारे को नष्ट-भ्रष्ट करनेवालों की वे जमकर 'खबर' लेते थे। उनकी भाषा सरल, सहज, लेकिन बेहद मारक और सीधा प्रहार करनेवाली होती थी।

धीरंजन मालवे | DHIRNJAN MALVE | INDIAN HINDI POET | साहित्यकार का जीवन परिचय

धीरंजन मालवे 

1952

धीरंजन मालवे का जन्म बिहार के नालंदा जिले के हुँवरावाँ गाँव 9 मार्च 1952 हुआ। ये एम. एससी. (सांख्यिकी), एम.बी.ए. और एल.एल.बी. आकाशवाणी और दूरदर्शन जुड़े मालवे अभी वैज्ञानिक जानकारी को लोगों तक पहुँचाने हुए आकाशवाणी और (लंदन) कार्य विज्ञान पत्रिका और प्रसारण

मालवे की भाषा सीधी, सरल और वैज्ञानिक शब्दावली लिए है। यथावश्यक अन्य भाषाओं शब्दों प्रयोग भी हैं। मालवे भारतीय वैज्ञानिकों की संक्षिप्त जीवनियाँ लिखी जो इनकी पुस्तक 'विश्व-विख्यात वैज्ञानिक' पुस्तक में समाहित हैं।

'वैज्ञानिक के वाहक रामन्' में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रथम भारतीय वैज्ञानिक संघर्षमय जीवन का चित्रण किया गया है। वेंकट रामन् कुल ग्यारह साल उम्र में मैट्रिक, विशेष साथ इंटरमीडिएट, और अंग्रेज़ी में स्वर्ण पदक साथ बी.ए. और प्रथम में करके मात्र अठारह साल की उम्र कोलकाता भारत सरकार के फाइनेंस डिपार्टमेंट सहायक जनरल एकाउंटेंट कर लिए गए थे। इनकी प्रतिभा से इनके अध्यापक तक अभिभूत थे।

1930 में नोबेल पुरस्कार पाने के बाद सी.वी. रामन् अपने एक मित्र उस पुरस्कार के बारे में लिखा था जैसे ही पुरस्कार लेकर मुड़ा और देखा जिस स्थान मैं बैठाया गया था, उसके ऊपर ब्रिटिश राज्य का 'यूनियन जैक' लहरा रहा तो मुझे अफ़सोस कि मेरे दीन देश भारत की अपनी पताका तक नहीं इस अहसास मेरा गला आया मैं फूट-फूट रो पड़ा।

शरद जोशी | SHARAD JOSHI | INDIAN HINDI POET | साहित्यकार का जीवन परिचय

शरद जोशी (1931-1991)

शरद जोशी का जन्म मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में 21 मई 1931 को हुआ। इनका बचपन कई शहरों में बीता। कुछ समय तक यह सरकारी नौकरी में रहे, फिर इन्होंने लेखन को ही आजीविका के रूप में अपना लिया। इन्होंने आरंभ में कुछ कहानियाँ लिखीं, फिर पूरी तरह व्यंग्य-लेखन ही करने लगे। इन्होंने व्यंग्य लेख, व्यंग्य उपन्यास, व्यंग्य कॉलम के अतिरिक्त हास्य-व्यंग्यपूर्ण धारावाहिकों की पटकथाएँ और संवाद भी लिखे। हिंदी व्यंग्य को प्रतिष्ठा दिलाने वाले प्रमुख व्यंग्यकारों में शरद जोशी भी एक हैं।

शरद जोशी की प्रमुख व्यंग्य-कृतियाँ हैं : परिक्रमा, किसी बहाने, जीप पर सवार इल्लियाँ, तिलस्म, रहा किनारे बैठ, दूसरी सतह, प्रतिदिन। दो व्यंग्य नाटक हैं : अंधों का हाथी और एक था गधा। एक उपन्यास हैं: मैं, मैं, केवल मैं, उर्फ कमलमुख बी.ए.।

शरद जोशी की भाषा अत्यंत सरल और सहज है। मुहावरों और हास-परिहास का हलका स्पर्श देकर इन्होंने अपनी रचनाओं को अधिक रोचक बनाया है। धर्म, अध्यात्म, राजनीति, सामाजिक जीवन, व्यक्तिगत आचरण, कुछ भी शरद जोशी की पैनी नज़र से बच नहीं सका है। इन्होंने अपनी व्यंग्य-रचनाओं में समाज में पाई जाने वाली सभी विसंगतियों का बेबाक चित्रण किया है। पाठक इस चित्रण को पढ़कर चकित भी होता है और बहुत कुछ सोचने को विवश भी।

यशपाल | YASHPAL | INDIAN HINDI POET | साहित्यकार का जीवन परिचय

यशपाल 

(1903-1976)

यशपाल का जन्म फिरोज़पुर छावनी में सन् 1903 में हुआ। इन्होंने आरंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में और उच्च शिक्षा लाहौर में पाई। यशपाल विद्यार्थी काल से ही क्रांतिकारी गतिविधियों में जुट गए थे। अमर शहीद भगतसिंह आदि के साथ मिलकर इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। यशपाल की प्रमुख कृतियाँ हैं : देशद्रोही, पार्टी कामरेड, दादा कामरेड, झूठा सच तथा मेरी, तेरी, उसकी बात (सभी उपन्यास), ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजड़े की उड़ान, फूलो का कुर्ता, उत्तराधिकारी (सभी कहानी संग्रह) और सिंहावलोकन (आत्मकथा)।

‘मेरी, तेरी, उसकी बात' पर यशपाल को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यशपाल की कहानियों में कथा रस सर्वत्र मिलता है। वर्ग-संघर्ष, मनोविश्लेषण और पैना व्यंग्य इनकी कहानियों की विशेषताएँ हैं।

यशपाल यह मानते रहे कि समाज को उन्नत बनाने का एक ही रास्ता है- सामाजिक समानता के साथ-साथ आर्थिक समानता। यशपाल ने अपनी रचनाओं में हिंदी के अलावा उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों का भी बेहिचक प्रयोग किया है।