रविवार, 16 जनवरी 2022

साखी, सबदी दोहरा, कहि कहनी, उपखान | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


साखी, सबदी दोहरा, कहि कहनी, उपखान।

भगति निरुपति भगत कलि, निहि वेद-पुरान।।

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चरन-चोंच-लोचन रंगौ, चलौ मराली चाल | तुलसी के दोहे |TULSI KE DOHE | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


चरन-चोंच-लोचन रंगौ, चलौ मराली चाल।

छीर-नीर विवरन-समय वक उधरत तेहि काल।।

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सूचे मन. सूधे वचन. सूधी सब करतूति | तुलसी के दोहे |TULSI KE DOHE | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


सूचे मन. सूधे वचन. सूधी सब करतूति।

तुलसी सूचि सकल विधि, रघुवर प्रेम प्रसूति।।

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एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास।

एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास।।

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रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पताल | रहीम के दोहे | RAHIM KE DOHE | #shorts | #hindi | #india

रहीम के दोहे


रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पताल।

आपु तो कहि भीतर गयी, जूती खात कपाल।।

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