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रविवार, 9 जनवरी 2022
तुलसी या संसार में, सबसे मिलिए धाय | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE |प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india
तुलसी के दोहे
तुलसी या संसार में, सबसे मिलिए धाय।
न जाने किस रूप में, नारायण मिल जाय।।
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सम कंचन काँचौ गिनत, सत्रु मित्र सम होइ | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE | प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india
तुलसी के दोहे
सम कंचन काँचौ गिनत, सत्रु मित्र सम होइ।
तुलसी या संसार में कहत संतजन सोइ।।
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तुलसी पावस के समै, धरीं कोकिला मौन | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE |प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india
तुलसी के दोहे
तुलसी पावस के समै, धरीं कोकिला मौन।
अब तो दादुर बोलि है, हमें पूछि है कौन॥
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सोई ज्ञानी सोई गुनी जन, सोई दाता ध्यानी | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE |प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india
तुलसी के दोहे
सोई ज्ञानी सोई गुनी जन, सोई दाता ध्यानी।
तुलसी जाके चित्त भई, राग द्वेष की हानि॥
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सतगुरु की महिमा अनँत, अनँत किया उपकार | कबीर के दोहे | KABIR KE DOHE | प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india
कबीर के दोहे
सतगुरु की महिमा अनँत, अनँत किया उपकार।
लोचन अनँत उघारिया, अनंत दिखावन हार।।
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