रविवार, 9 जनवरी 2022

तुलसी या संसार में, सबसे मिलिए धाय | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE |प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


तुलसी या संसार में, सबसे मिलिए धाय।

न जाने किस रूप में, नारायण मिल जाय।।

****

सम कंचन काँचौ गिनत, सत्रु मित्र सम होइ | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE | प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


सम कंचन काँचौ गिनत, सत्रु मित्र सम होइ।

तुलसी या संसार में कहत संतजन सोइ।।

******

तुलसी पावस के समै, धरीं कोकिला मौन | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE |प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


तुलसी पावस के समै, धरीं कोकिला मौन।

अब तो दादुर बोलि है, हमें पूछि है कौन॥

*****

सोई ज्ञानी सोई गुनी जन, सोई दाता ध्यानी | तुलसी के दोहे | TULSI KE DOHE |प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india

तुलसी के दोहे


सोई ज्ञानी सोई गुनी जन, सोई दाता ध्यानी।

तुलसी जाके चित्त भई, राग द्वेष की हानि॥

*****

सतगुरु की महिमा अनँत, अनँत किया उपकार | कबीर के दोहे | KABIR KE DOHE | प्राचीन काव्य | #shorts | #hindi | #india

कबीर के दोहे


सतगुरु की महिमा अनँत, अनँत किया उपकार।

लोचन अनँत उघारिया, अनंत दिखावन हार।।

*******