बुधवार, 5 जनवरी 2022

कबीर घास न नींदिए, जो पाऊँ तलि होइ | कबीर की साखियाँ | KABIR KE SAKHI | NCERT | दोहे | #shorts | #hindi | #india

कबीर के दोहे


कबीर घास न नींदिए, जो पाऊँ तलि होइ।

उड़ि पड़े जब आँखि मैं, खरी दुहेली होइ।।

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माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि | कबीर की साखियाँ | KABIR KE SAKHI | NCERT | दोहे | #shorts | #hindi | #india

कबीर के दोहे


माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि।

मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरै, यह तौ सुमिरन नाहिं।।

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आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक | कबीर की साखियाँ | KABIR KE SAKHI | NCERT | दोहे | #shorts | #hindi | #india

कबीर के दोहे


आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक।

कह कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक।।

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जाति न पूछो साथ की, पूछ लीजिए ज्ञान | कबीर के दोहे | KABIR KE SAKHI | NCERT | दोहे | #shorts | #hindi | #india

कबीर के दोहे


जाति न पूछो साथ की, पूछ लीजिए ज्ञान।

मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।।

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धरती की-सी रीत है, सीत घाम औ मेह। | रहीम के दोहे | RAHIM KE DOHE | NCERT | दोहे | #shorts | #hindi | #india

रहीम के दोहे

धरती की-सी रीत है, सीत घाम औ मेह।

जैसी परे सो सहि रहे, त्यों रहीम यह देह।।

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