शनिवार, 28 जनवरी 2017

घनानंद की प्रेम व्यंजना

घनानंद की प्रेम व्यंजना

अपभ्रंश, अवहट्ट और पुरानी हिन्दी

अपभ्रंश, अवहट्ट और पुरानी हिन्दी

अपभ्रंश, अवहट्ट और पुरानी हिन्दी

इस वीडियो में अपभ्रंश, अवहट्ट और पुरानी हिन्दी के स्वरूप समझाया, ऐसे ही अपभ्रंश के विविध रूपों की जानकारी दी।

*** पुरानी हिन्दी का प्रत्यक्ष ऐतिहासिक संबंध गुलेरी जी कथित पिछली अपभ्रंश, शुक्ल जी कथित देशभाषा मिश्रित अपभ्रंश, द्विवेदी जी द्वारा कथित आगे बढी हुई गाम्य अपभ्रंश, डॉ. नामवर सिंह कथित उत्तर या परवर्ती अपभ्रंश से है।

*** विभिन्न आलोचकों ने माना कि अपभ्रंश का परिनिष्ठित साहित्य, जो स्वयंभू, पुष्पदंत, धनपाल, देवसेन आदि की रचनाओं में सुरक्षित है।

 

केशवदास का आचार्यत्व

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