Sunday, January 20, 2019

हिन्दी साहित्य का इतिहास – रीतिकालीन काव्य के प्रेरणास्त्रोत

हिन्दी साहित्य का इतिहास – रीतिकालीन काव्य के प्रेरणास्त्रोत 

*** रीतिकाल का सामान्य परिचय प्राप्त करने के साथ उसके आशय से परिचित करवाना.....

*** रीतिकालीन हिन्दी कविता अपने युग-परिवेश में व्यापक श्रृंगारिक भावनाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति करने वाली कलात्मक कविता है, जिसकी प्रमुख प्रवृति रीतिनिरूपण करनेवाले काव्यशास्त्रीय लक्षणग्रंथों के माध्यम से काव्याभिव्यक्ति करना है.........

*** राजाश्रय एवं राजदरबार में फलने-फूलने के कारण इस काल की कविता में पांडित्यप्रदर्शन और चमत्कारपूर्ण काव्यरचना की प्रवृति दिखाई देती है.......

*** संस्कृत साहित्य की समृद्ध काव्यशास्त्रीय परंपरा.......

*** प्राकृत, अपभ्रंश और संस्कृत साहित्य का श्रृंगारी साहित्य.....

*** रीतिकालीन काव्य के काव्यशास्त्रीय एवं रचनात्मक प्रेरक पृष्ठभूमि......

Friday, January 18, 2019

हिन्दी साहित्य का इतिहास – प्रेमाश्रयी काव्यधारा

हिन्दी साहित्य का इतिहास – प्रेमाश्रयी काव्यधारा 

*** प्रेमाश्रयी काव्यधारा के प्रमुख प्रवृतियों एवं रचनाकारों के बारे में समझाना....

*** हिन्दी में प्रेमाख्यानक काव्य परम्परा के विकास को समझना.......

*** जायसी का महत्व... पद्मावत को एक सुन्दर महाकाव्य का रूप प्रदान करना.....

*** अद्भुत घटनाओं का संयोजन, लोकप्रचलित धर्म एवं विश्वासों का अवलम्बन तथा बोलचाल की अवधी का प्रयोग जासयी को महान लोककवि के रूप में स्थान मिलना.....

*** प्रेमाख्यान काव्य के सूफियों के संदर्भ में दिनकर ने लिखा है - “ये हिन्दुत्व से पैर से पैर मिलाकर चलनेवाले लोग थे।“

***इस परम्परा की एक विशेषता है कि नायिकाओं के नाम पर रचनाएँ लिखी गई है जैसे पद्मावत,सत्यवती, मृगावती आदि।

*** प्रेमाख्यान काव्यों में फारसी रहस्यवाद का भारतीय अद्धैतवाद से मेल मिलता है.....

*** प्रमुख काव्य – हंसावली, चंदायन, लखनसेन पद्मावत कथा, सत्यवती, पद्मावत, मधुमालती, ढोला मारू रा दूहा, रूपमंजरी, चित्रावली आदि।

हिन्दी साहित्य का इतिहास – ज्ञानाश्रयी काव्यधारा

हिन्दी साहित्य का इतिहास – ज्ञानाश्रयी काव्यधारा 

*** निर्गुण एवं सगुण धारा का भेद समझाना.......

*** निर्गुण धारा के एक अंग ज्ञानाश्रयी काव्यधारा का परिचय........

*** ज्ञानाश्रयी काव्यधारा के प्रमुख संतों और उनकी रचनाओं का परिचय........

*** इस काव्यधारा के कवि लोक, परलोक दोनों को भी महत्व देते है.......

*** एक ओर वे सांसारिक भोगविलास की निन्दा करते है... दूसरी तरफ सामाजिक जीवन में व्याप्त कटुता, विषमता आदि का विरोध करते है....

*** इस धारा के कवि श्रम का महत्व प्रतिपादित किया.....

*** इनका सबसे प्रमुख देय है – समाज की विषमता का विरोध तथा मानववाद की स्थापना....

*** इस काल के कवियों ने आम आदमी में गौरव एवं स्वाभिमान भर दिया।

हिन्दी साहित्य का इतिहास – रामभक्ति काव्यधारा

हिन्दी साहित्य का इतिहास – रामभक्ति काव्यधारा 

*** हिन्दी काव्य में रामभक्ति काव्यधारा के महत्व को समझना...

*** राम काव्यधारा के प्रमुख कवियों और उनकी रचनाओँ से परिचय करवाना....

*** राम काव्यधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि तुलसीदास है। तुलसीदास के महत्व समझाना (रामकाव्य के संदर्भ में).......

*** रामकथा का प्राचीन स्त्रोत वाल्मीकि रामायण है... वहाँ से अब तक की पहचान.....

*** रामकाव्य की अजश्र धारा आधुनिक काल में भी प्रवाहित है।

*** आधुनिक काल के अनेक कवियों ने रामकथा से सम्बंधित रचनाएँ की है। पर उनमें साकेत, वैदेही वनवास और राम की शक्तिपूजा विशेष उल्लेखनीय है।